चिंगम चबाना आमतौर पर मनोरंजन, मुंह की ताजगी और सांसों की बदबू कम करने के लिए किया जाता है। लेकिन शुगर-फ्री चिंगम चबाने से मुंह में लार का उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे दांतों की सुरक्षा में मदद मिलती है।
ध्यान रखें कि चिंगम किसी बीमारी का सीधा इलाज नहीं है। यह केवल कुछ समस्याओं से बचाव या उनके लक्षणों में थोड़ी राहत देने में सहायक हो सकती है। खासकर दांतों में कीड़ा लगने यानी डेंटल कैविटी के खतरे को कम करने में इसका उपयोग किया जाता है।
चिंगम चबाने से कौन सी बीमारी ठीक होती है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि चिंगम किसी बीमारी को “ठीक” नहीं करती। शुगर-फ्री चिंगम दांतों में कैविटी बनने के जोखिम को कम कर सकती है और मुंह के सूखेपन में अस्थायी राहत दे सकती है।
इसके अलावा, चिंगम चबाने से लार का प्रवाह बढ़ता है। लार भोजन के छोटे कणों को हटाने, मुंह में बने एसिड को कम करने और दांतों के बाहरी हिस्से यानी इनेमल की सुरक्षा करने में मदद करती है।
कुछ चिंगम में xylitol या sorbitol जैसे स्वीटनर होते हैं। इनसे सामान्य चीनी की तरह कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद नहीं मिलती।
चिंगम से मिलने वाले संभावित फायदे
- दांतों में कैविटी के खतरे को कम करने में मदद।
- मुंह में बनने वाले हानिकारक एसिड को कम करना।
- भोजन के बचे हुए कणों को हटाने में सहायता।
- मुंह का सूखापन यानी dry mouth में थोड़ी राहत।
- सांसों की बदबू को कुछ समय के लिए कम करना।
- दांतों के इनेमल को दोबारा मजबूत बनने में सहायता।
- भोजन के बाद मुंह का pH सामान्य करने में मदद।
- कुछ लोगों में मीठा खाने की इच्छा को थोड़ी देर के लिए कम करना।
चिंगम और दांतों की कैविटी
दांतों में कैविटी तब बनती है जब मुंह में मौजूद बैक्टीरिया खाने की चीनी और स्टार्च को तोड़कर एसिड बनाते हैं। यह एसिड दांतों के इनेमल को कमजोर करता है और धीरे-धीरे दांत में छेद बन सकता है।
शुगर-फ्री चिंगम चबाने से लार अधिक बनती है। लार एसिड को neutralize करने और दांतों की सतह से भोजन के कणों को हटाने में मदद करती है।
अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, भोजन के बाद शुगर-फ्री चिंगम चबाना दांतों में सड़न के जोखिम को कम करने वाली सामान्य oral care routine का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, यह ब्रश करने का विकल्प नहीं है।
चिंगम कैसे काम करती है?
चिंगम चबाने पर मुंह में mechanical movement और स्वाद के कारण लार का उत्पादन बढ़ता है। सामान्य स्थिति की तुलना में लार का प्रवाह लगभग 10 से 12 गुना तक बढ़ सकता है
लार में कैल्शियम, फॉस्फेट और बाइकार्बोनेट जैसे तत्व होते हैं। ये तत्व मुंह के एसिड को कम करने और कमजोर इनेमल की remineralization में मदद कर सकते हैं।
चिंगम के काम करने का तरीका
| फायदा या प्रक्रिया | चिंगम का प्रभाव |
| लार का उत्पादन | मुंह में saliva flow बढ़ता है |
| एसिड कम करना | बैक्टीरिया से बने acids neutralize होते हैं |
| भोजन के कण हटाना | छोटे food particles बाहर निकलने में मदद मिलती है |
| इनेमल की सुरक्षा | कैल्शियम और फॉस्फेट से enamel को सहायता मिलती है |
| कैविटी से बचाव | दांतों में सड़न का खतरा कम हो सकता है |
| मुंह का सूखापन | dry mouth में अस्थायी आराम मिल सकता है |
| सांसों की बदबू | bad breath कुछ समय के लिए कम हो सकती है |
| बैक्टीरिया पर असर | xylitol वाले gum से कुछ harmful bacteria कम हो सकते हैं |
Sugar-free और Sugar वाली चिंगम में अंतर
हर चिंगम दांतों के लिए अच्छी नहीं होती। Sugar वाली चिंगम में sucrose, glucose या अन्य fermentable sugar हो सकती है। मुंह के बैक्टीरिया इन sugars को एसिड में बदल सकते हैं, जिससे कैविटी का खतरा बढ़ सकता है।
इसके विपरीत, sugar-free gum में आमतौर पर xylitol, sorbitol, mannitol या अन्य sweeteners इस्तेमाल किए जाते हैं। ये सामान्य चीनी की तुलना में दांतों के लिए बेहतर माने जाते हैं।
चिंगम खरीदते समय पैकेट पर “sugar-free”, “no added sugar” और xylitol जैसे शब्द देखें। हालांकि “sugar-free” लिखे होने के बावजूद इसे बहुत अधिक मात्रा में चबाना सही नहीं है।
चिंगम चबाने का सही तरीका
दांतों की सुरक्षा के लिए चिंगम को भोजन या snack के बाद चबाना बेहतर माना जाता है। शोध में भोजन के बाद कुछ मिनट तक sugar-free gum चबाने से कैविटी के जोखिम में कमी देखी गई है।
सही इस्तेमाल के आसान नियम
- भोजन के बाद शुगर-फ्री चिंगम चुनें।
- इसे लगभग 5 से 20 मिनट तक चबा सकते हैं।
- दिन में लगभग 3 बार तक चबाना पर्याप्त हो सकता है।
- चिंगम को निगलें नहीं।
- बहुत hard या ज्यादा chewy gum से बचें।
- चिंगम चबाते समय तेज दर्द हो तो तुरंत बंद कर दें।
- बच्चों को चिंगम देते समय choking risk का ध्यान रखें।
- पैकेट में मौजूद sweeteners और ingredients जरूर पढ़ें।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
जिन लोगों को जबड़े में दर्द, jaw clicking, सिरदर्द या TMJ disorder है, उन्हें ज्यादा देर तक चिंगम नहीं चबानी चाहिए। लंबे समय तक चबाने से jaw muscles और joints पर दबाव बढ़ सकता है।
कुछ लोगों को sorbitol या अन्य sugar alcohols से गैस, पेट दर्द या दस्त हो सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर चिंगम बंद कर दें।
छोटे बच्चों को चिंगम देते समय विशेष सावधानी जरूरी है, क्योंकि इसे निगलने या गले में अटकने का खतरा हो सकता है। braces, dentures, fillings या dental treatment वाले लोगों को अपने dentist से सलाह लेनी चाहिए।
क्या चिंगम ब्रश का विकल्प है?
नहीं, चिंगम ब्रश और फ्लॉस का विकल्प नहीं है। दांतों की सही देखभाल के लिए दिन में दो बार fluoride toothpaste से ब्रश करना, रोजाना दांतों के बीच की सफाई करना और समय-समय पर dentist से जांच कराना जरूरी है।
अगर दांत में दर्द, छेद, खून आना, सूजन, लगातार बदबू या ठंडा-गर्म लगने की समस्या है, तो केवल चिंगम पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में dental check-up जरूरी हो सकता है।
निष्कर्ष
चिंगम चबाने से कोई बीमारी सीधे ठीक नहीं होती। लेकिन भोजन के बाद sugar-free chewing gum चबाने से लार बढ़ सकती है और इससे दांतों में कैविटी, मुंह का सूखापन और सांसों की बदबू को नियंत्रित करने में कुछ मदद मिल सकती है।
सबसे अच्छा लाभ तभी मिलेगा जब चिंगम को संतुलित तरीके से इस्तेमाल किया जाए और साथ में brushing, fluoride toothpaste तथा नियमित dental care भी जारी रखी जाए।